श्री प्रेम बिहारी जी के भजन

भगवान के भजनो से जो मन को शांति और आनंद मिलता है वो और किसी चीज में नहीं मिलता

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ । 

 मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की जाई हूँ ॥ 

 अरे रसिया, ओ मन वासिय, मैं इतनी दूर से आयी हूँ ॥ 

 सुना है श्याम मनमोहन, के माखन खूब चुराते हो । 

 उन्हें माखन खिलने को मैं मटकी साथ लायी हूँ ॥ 

 सुना है श्याम मनमोहन, के गौएँ खूब चरते हो । 

 तेरे गौएँ चराने को मैं ग्वाले साथ लायी हूँ ॥ 

 सुना है श्याम मनमोहन, के कृपा खूब करते हो । 

 तेरी कृपा मैं पाने को तेरे दरबार आयी हूँ ॥

इतना बता दे हमको कन्हैया

इतना बता दे हमको कन्हैया क्यों परिवार टूटता है,

पैसों की खातिर एक भाई भाई से ही रूठता है.....

बचपन में क्या प्यार था इनमें एक दूजे पर मरते थे,

मात मेरी है पिता है मेरा बस इस बात पर लड़ते थे,

अब पैसों के आगे इनको और कोई ना भाता है,

इतना बता दे हमको कन्हैया.....

भाई बहन के प्यार की जग में लोग मिसाल है देते थे,

द्रोपती और कान्हा के जैसा रिश्ता है यह कहते थे,

अब राखी के दिन ही हमको याद यह रिश्ता आता है,

इतना बता दे हमको कन्हैया.....

रिश्तो से बढ़कर के है क्या पैसा कोई बतलाए,

इन पैसों से एक तो सच्चा प्यार खरीद के दिखलाएं,

फिर पैसों के बल पर इतना क्यों कोई रहता है,

इतना बता दे हमको कन्हैया.....

मुझको रुला दिया है तेरी याद ने कन्हैया

हमको रुला दिया है, तेरी याद ने कन्हैया,

पागल बना दिया है, तेरी याद ने कन्हैया,

हमको रुला दिया हैं, तेरी याद ने कन्हैया......

नन्दलाल इतने निष्ठुर, निर्मोही हो गए हो,

निर्मोही हो गए हो, वादा भुला दिया है,

तेरी याद ने कन्हैया, हमको रुला दिया हैं,

तेरी याद ने कन्हैया.......

बरसों से नैना बरसे, तुझे देखने को तरसे,

बस तुझे देखने को तरसे, विरही बना दिया है,

तेरी याद ने कन्हैया, हमको रुला दिया हैं,

तेरी याद ने कन्हैया......

सावन अंगार बरसे, फागुन होरी को तरसे,

फागुन होरी को तरसे, इस दिल को जला दिया है,

तेरी याद ने कन्हैया, हमको रुला दिया हैं,

तेरी याद ने कन्हैया........

हमको रुला दिया है, तेरी याद ने कन्हैया,

पागल बना दिया है, तेरी याद ने कन्हैया,

हमको रुला दिया हैं, तेरी याद ने कन्हैया.......

बांके बिहारी की देख छटा भजन

कब से खोजूं बनवारी को, बनवारी को, गिरिधारी को।

कोई बता दे उसका पता, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥

मोर मुकुट श्यामल तन धारी, कर मुरली अधरन सजी प्यारी।

कमर में बांदे पीला पटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥

पनिया भरन यमुना तट आई, बीच में मिल गए कृष्ण कन्हाई।

फोड़ दियो पानी को घटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥

टेडी नज़रें लत घुंघराली, मार रही मेरे दिल पे कटारी।

और श्याम वरन जैसे कारी घटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥

मिलते हैं उसे बांके बिहारी, बांके बिहारी, सनेह बिहारी।

राधे राधे जिस ने रटा, मेरो मन है गयो लटा पटा॥

॥ बांके बिहारी की देख छटा...॥

बांके बिहारी की देख छटा, मेरो मन है गयो लटा पटा।